मंगलवार, 2 सितंबर 2025

विजय रंजन कृत राष्ट्रवादी लेखन : एक झलक

 भारतीय राष्ट्रवाद , भारतीयता, भारतीयतागत श्रेष्ठता, राष्ट्र-प्रेम, राष्ट्र-कल्याण सदृश परिप्रेक्ष्यों में विजय रंजन का लेखन पृथुलकाय नहीं है, लेकिन जो कुछ है, वह बहुत कम भी नहीं है। ऐसा लेखन बहुत महत्त्वपूर्ण,  प्रेरणादायी और सारवान् है, जो विद्वानों द्वारा अति प्रशंसित  भी है। 

राष्ट्रवादी लेखन से सम्बन्धित विजय रंजन कृत कृति ‘भारतीय राष्ट्रवाद का क ख् ग’ की शताधिक समीक्षकों एवं पाठकों द्वारा समीक्षा की गई। इस कृति को ख्यात समीक्षिका डॉ0 बीना शर्मा ने (पूर्व निदेशक, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा ने) ‘अपने विषय का मानस (भारतीय राष्ट्रवाद विषय का रामचरितमानस सदृश ग्रंथ)’ बताया।

इसी तरह श्री रंजन की कृति ‘क्या है भारत क्या है भारतीयता’ की भी प्रशंसा शताधिक समीक्षकों ने की है। अनेक समीक्षकों ने उसे अपने विषय का इनसाइक्लोडिया बताया है। 

भारतीय राष्ट्रवाद से सम्बन्धित कहानी, कविता, लघुकथाएँ भी श्री रंजन ने विरचित की हैं। 2009 में प्रकाशित उनकी कृति किर्चें में राष्ट्र-चिन्तना से सम्बन्धित गीत, गजल प्रकाशित हैं, जबकि श्री रंजन -प्रणीत तत्सम्बन्धी कहानी, लघुकथाएँ पाण्डुलिपित एवं शीघ्र प्रकाश्य हैं। 

श्री रंजन के कतिपय राष्ट्रवादी लेख आदि देश-विदेश की स्तरीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुए हैं। 

श्री रंजन-प्रणीत राष्ट्रवादी लेखन का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है-

* कृतियाँ

 # 'भारतीय राष्ट्रवाद का क ख ग' प्रकाशित वर्ष (2022)

# ‘क्या है भारत क्या है भारतीयता’ प्रकाशित वर्ष (2019)

# 'भारतीय राष्ट्रवाद   : एक विशिष्ट विमर्श' (पाण्डुलिपित, शीघ्र प्रकाश्य)

# 'भारत एवं भारतीयता : विशिष्ट प्रत्यय'  (पाण्डुलिपित, शीघ्र प्रकाश्य)

* आलेख  

^ सात्त्विक शान्तिकामी भारतीय राष्ट्रवाद (  पत्रिका वीणा में प्रकाशित)

^ भारतीय राष्ट्रवाद पाश्चात्य राष्ट्रवाद से भिन्न [पत्रिका भावक, (आगरा), वसुधा (कनाडा ) में प्रकाशित]

^ भारतीय राष्ट्रवाद   : एक सांस्कृतिक आवश्यकता (पत्रिका वीणा, अक्षरा,  राष्ट्रधर्म में प्रकाशित )

^ रामायणम् में राष्ट्रवाद ( साहित्य भारती, लखनऊ, तुलसीदल, अयोध्या में प्रकाशित)

^ समर्थ  भारत की पदचाप (हिन्दी विवेक, मुम्बई में प्रकाशित)

^ सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् : विशुद्ध भारतीय अवधारणा ( पत्रिका आधारशिला (चण्डीगढ़) एवम् पत्रिका भारत-दर्शन, न्यूजीलैण्ड में प्रकाशित, आकाशवाणी अयोध्या से भी प्रसारित)

अप्रतिम सांस्कृतिक भारतीय धरोहर योग   ( पत्रिका भावक, (आगरा), वसुधा (कनाडा ) में प्रकाशित, आकाशवाणी अयोध्या से भी प्रसारित)

^ बसन्तपंचमी के निहितार्थ (पत्रिका अभिदेशक में प्रकाशित)

^ जय भारत जय भारती    ( पत्रिका वीणा में प्रकाशित)

^  भारतमाता की जय ----  चिन्तन सृजन, दिल्ली में प्रकाशित)

^ रामराज्य कैसे आए (समाचारपत्र  जनमोर्चा में प्रकाशित)

^ भारतीय राष्ट्रवाद और वैश्वीकरण ( निबन्ध संग्रह  ‘वातायन से’ में संगृहीत)

^ साहित्य के समक्ष नए प्रश्न  (वीणा एवं अक्षरा पत्रिका में प्रकाशित)

^ भारतीय राष्ट्रवाद अधोमुख  क्यों (पत्रिका साहित्य परिक्रमा में प्रकाशित)

आदि-इत्यादि आलेख शीघ्र प्रकाश्य निबन्ध संग्रह  ‘वातायन से’ में संगृहीत।

* कहानियाँ

>  प्रतिमान ( कहानी संग्रह ‘उभरते बिम्ब’ में प्रकाशित)

> बुलव्वा (शीघ्र प्रकाश्य कहानी संग्रह ‘धरती क्षितिज में’ में पाण्डुलिपित)

                      * लघुकथाएँ                                                            

0 जनेऊ की शपथ (शीघ्र प्रकाश्य लघुकथा-संग्रह ‘टुकड़े-टुकड़े’ में पाण्डुलिपित)

0 ज्वार-भाटा (शीघ्र प्रकाश्य लघुकथा-संग्रह ‘टुकड़े-टुकड़े’ में पाण्डुलिपित)

* हिन्दी गजल-

15 अगस्त से (2009 में प्रकाशित कविता-संग्रह ‘ किर्चें ’ एवम् 2021 में प्रकाशित ‘दर्पण तीरे’ में  संगृहीत) 

* गीत-

जय भारत जय भारती (शीघ्र प्रकाश्य गीत-संग्रह ‘गीत तुम्हारे नाम’ में संगृहीत)

बजेंगी जंजीरें   (शीघ्र प्रकाश्य गीत-संग्रह ‘गीत तुम्हारे नाम’ में संगृहीत)

* ज्ञापन  

राष्ट्रवाद और राष्ट्र-कल्याण के हेतुक से भारत सरकार को अनेक ज्ञापन प्रेषित।

विजय रंजन की राष्ट्रवाद से सम्बन्धित एकाधिक कृतियाँ पाण्डुलिपित और शीघ्र प्रकाश्य हैं, जबकि कुछेक कृतियाँ प्रणयन गतिमान की अवस्था में हैं। 

उपर्युक्त के अतिरिक्त विजय रंजन के लेखन की राष्ट्रवादी विशेषता के क्रम में एक बिन्दु और- परिस्पष्ट है कि विजय रंजन के आलेखों में देशज-विदेशज विद्वानों के उद्धरणों की भरमार रहती है। लेकिन विद्वानों को उद्धृत करते समय भी वे अपने आलेखों में विजय रंजन विदेशी विद्वानों से पहले भारतीय मनीषियों को ही उद्धृतम करते हैं। विदेशज विद्वानों का क्रम में वे बाद में रखते हैं।  भारतीय मनीषा की श्रेष्ठता पर उनकी आस्था का यह अतिरिक्त प्रमाणक है।

इस प्रकार विजय रंजन का लेखन निस्सन्देह श्रेष्ठ भारतीयतावादी राष्ट्रवादी सहित्भावी लेखन है।

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